Gautam Buddha Motivational Story In Hindi |प्रेरक कहानियां
Gautam Buddha Motivational Story In Hindi |प्रेरक कहानियां | Inspirational And Motivational Kahani in Hindi.
Gautam Buddha Motivational Story In Hindi = दोस्तों किसी ने सही कहा है कि आवाज ऊंची हो तो कुछ लोग सुनते हैं लेकिन अगर बात ऊंची हो तो बहुत सारे लोग सुनते हैं। नमस्कार दोस्तों, Best Life Hindi चैनल में आपका दिल से स्वागत है।
Gautam Buddha Motivational Story In Hindi.
एक छोटी सी कहानी यह कहानी एक लड़के की 24 साल का लड़का जो सेठ के यहां पर नौकरी करता था। उसके मां-बाप इस दुनिया में नहीं थे जिंदगी बड़ी परेशानी में चल रही थी वह जाता था रोजाना पैसे कमा कर के घर आता था ना बनाता था खाता था सो जाता था।
एक दिन उसने देखा कि एक बूढ़ा फकीर अपनी पीठ पर तीन ठेले लेकर एक शहर से दूसरे शहर की ओर जा रहा था वह काफी बूढ़े भी थे और काफी देर से वह यूं ही सफर कर रहे थे और आखिरकार कुछ दूर और सफर करने के बाद वह चलते चलते थक कर एक पेड़ के नीचे बैठ गए तभी उनकी नजर एक नौजवान युवक पर पड़ी जो उसी रास्ते से जा रहा था और वह भी उसी दिशा में जा रहा था।
जिस दिशा में उन बूढ़े फकीर को जाना था तभी वह लड़का उन बूढ़े फकीर के पास से होकर गुजरा इस पर वह फकीर उस लड़के से कहते हैं सुनो बेटा क्या तुम मेरी थोड़ी सी मदद कर सकते हो यह ठेला बहुत भारी है और मैं बूढ़ा हो चुका हूं।
मैं ज्यादा समय तक इनका बोझ नहीं उठा सकता और मैं बहुत थक भी चुका हूं तो क्यों ना तुम मेरे एक ठेले को ले लो और मुझे उस दूसरे गांव तक पहुंचा दो इसके बदले में मैं तुम्हें तीन स्वर्ण मुद्राएं दूंगा।
वह लड़का उन फकीर की सारी बातें सुनता है और उन फकीर से कहता है कोई बात नहीं बाबा मैं आपकी मदद करने के लिए तैयार हूं कहिए आपको कहां जाना है। ऐसा कहकर उस लड़के ने उन फकीर का एक ठेला उठा लिया और अपने कंधे पर ले लिया तभी उस जवान लड़के को यह एहसास हुआ कि यह ठेला तो सचमुच बहुत भारी है।
वह लड़का और फकीर दोनों रास्ते में आगे की ओर बढ़ चले कुछ दूर आगे चलने के बाद देखते ही देखते वह गांव खत्म होने लगा और अब एक सुन सान रास्ता आगे की ओर जा रहा था वे दोनों अपने मार्ग में मस्त होकर आगे की ओर बढ़ रहे थे जब भीड़ से पूरी तरह से अलग हो गए तो वह लड़का उन फकीर से कहता है।
बाबा इस ठेले में आखिर ऐसा क्या रखा है जो यह ठेला इतनी वजन है इस पर वह फकीर आदमी उस लड़के को जवाब देते हुए कहते हैं कुछ नहीं बेटा बस इसमें तांबे के कुछ सिक्के भरे हुए हैं इसी कारण यह ठेले में बहुत वजन है उन फकीर की यह बात सुनकर वह लड़का मन ही मन सोचने लगा।
लगता है यह बाबा जरूर कोई व्यापारी है तभी तो इतने सारे तांबे के सिक्के लेकर चल रहे हैं और फिर तभी उसके मन में एक ख्याल आया कि मुझे क्या करना है मुझे तो खाली यह ठेला दूसरे गांव तक पहुंचा है बस इतना ही जैसे ही उसके मन में यह ख्याल आया उसने तांबे के सिक्कों का वह ख्याल मन से निकाल दिया और अपनी धुन में मस्त होकर वह आगे की ओर चलने लगा।
चलते चलते कुछ और समय बीता और वे दोनों एक नदी के किनारे जा पहुंचे वह लड़का हट्टा कट्टा था और काफी चुस्त और तंदुरुस्त भी था। इसलिए वह बिना सोचे समझे उस नदी में उतर जाता है किंतु वह फकीर अब भी किनारे पर ही खड़े थे। इस पर वह लड़का उन फकीर से कहता है।
क्या हुआ बाबा चलिए आइए हमें यह नदी पार करनी होगी तभी तो हम उस गांव तक पहुंच पाएंगे। इस पर वह फकीर उस लड़के से कहते हैं मैं जानता हूं बेटा कि हमें यह नदी पार करनी होगी। लेकिन जैसा कि तुम जानते हो मैं अब बूढ़ा हो चुका हूं और दोदो ठेले लेकर मैं यह नदी पार नहीं कर सकता कहीं मेरा पांव फिसल गया तो क्या होगा।
क्या तुम मेरी एक और गठरी ले सकते हो मैं तुम्हें इसके बदले भी तीन स्वर्ण मुद्राएं दूंगा इस पर वह लड़का मुस्कुराते हुए उन फकीर से कहता है बाबा आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं। यदि आप मुझे स्वर्ण मुद्राएं ना भी दे तो भी मैं आपका कार्य अवश्य करूंगा मैं आपको उस दूसरे गांव तक जरूर पंचांगा।
इस पर वह फकीर मुस्कुराते हुए उस लड़के से कहते हैं बेटा तुम तो बड़े ही भले इंसान लगते हो इतना कहकर उन्होंने वह दूसरी गठरी भी उस लड़के को थमा दी उस लड़के ने जब वह दूसरी गठरी अपने कंधे पर रखी तो वह गठरी भी उसे बहुत ज्यादा भारी लगी लेकिन उसने वहां पर कुछ नहीं कहा जैसे तैसे उन दोनों ने नदी पार की नदी पार करने के बाद बातों-बातों में ही उस लड़के ने उन फकीर से कहा बाबा आखिर इस दूसरी गठरी में क्या है।
यह गठरी भी बहुत वजन है इस पर वह फकीर उस लड़के को जवाब देते हुए कहते हैं बेटा इसमें चांदी के सिक्के हैं इसी कारण यह गठरी भी बहुत वजन है उन फकीर की यह सारी बातें सुनकर अब उस लड़के का दिमाग तेजी से काम करने लगा था।
वह यह सोच रहा था कि एक ठेले में तांबे के सिक्के हैं और दूसरी में चांदी के ऐसा प्रतीत होता है मानो यह फकीर बाबा कहीं दूर से आ रहे हैं और उन्होंने अपनी सारी जमीन जायदाद बेचकर यह सारे सिक्के इकट्ठे किए हैं।
तभी तो वह इतना धन लेकर चल रहे हैं। लेकिन वह लड़का उन फकीर से कुछ नहीं कहता और वे दोनों चुपचाप मार्ग में आगे की ओर बढ़ते चले जाते हैं कुछ दूर आगे बढ़ने के बाद एक बार फिर एक सुनसान राह आती है उस सुनसान रास्ते को देखते ही उस लड़के के मन में तरह-तरह के विचार उत्पन्न होने लगे वह यह सोचने लगा अरे यह तो सुनसान जगह है।
अगर मैं यह सिक्के लेकर यहां से भाग जाऊं तो यह फकीर मुझे कब तक दौड़ आएंगे मुझे नहीं लगता कि मुझे कभी पकड़ पाएंगे और यहां पर कोई है भी नहीं जो इनकी मदद कर पाए और वैसे भी यह बहुत सारे सिक्के हैं मैं इनसे एक अच्छी दुकान खरीद सकता हूं अपना नया व्यापार शुरू कर सकता हूं और वैसे भी यह बूढ़ा फकीर अब इन पैसों का क्या करेगा।
इससे अच्छा तो मैं ही इन्हे रख लेता हूं वह लड़का यह सब बारे में सोच ही रहा था तभी अचानक उसे खुद पर आश्चर्य हुआ अरे मैं यह क्या सोच रहा हूं यह फकीर बाबा ना जाने कहां से आ रहे हैं और क्या खोज करके इन्होंने इतने सारे पैसे इकट्ठा किए होंगे मुझे इनका फायदा नहीं उठाना चाहिए नहीं नहीं मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए।
उसने कुछ देर के लिए तो अपने मन के विचारों को काबू कर लिया लेकिन कुछ देर बाद उसके मन के विचार उस पर देखते ही देखते हावी होने लगे वह लड़का दो ठेले लेकर उन फकीर के पीछे-पीछे चल रहा था और कुछ दूर आगे चलने के बाद एक पहाड़ी आई इस पर वह फकीर बाबा उस लड़के से कहते हैं।
बेटा यह पहाड़ी मैं नहीं चढ़ पाऊंगा मैं काफी बूढ़ा हो चुका हूं और मेरे घुटनों में भी दर्द रहता है यदि तुम मेरी तीसरी गठरी भी ले लो तो मैं तुम्हें तीन और स्वर्ण मुद्राएं दूंगा। लेकिन याद रखना इसे कहीं गिराना मत कहीं यह गठरिया खुल ना जाए इस पर वह लड़का उन फकीर से कहता है।
क्यों बाबा आखिर इसमें ऐसा क्या है इस पर वह फकीर उस लड़के से कहते हैं बेटा इसमें स्वर्ण मुद्राएं हैं यह सुनकर वह लड़का मन ही मन बहुत प्रसन्न हुआ उसने चुपचाप वह गटरी भी उन फकीर से ले ली और देखते ही देखते वे दोनों मार्ग में आगे की ओर बढ़ने लगे।
अब वह फकीर बिना कोई वजन लिए हुए आराम से पहाड़ की चढ़ाई पर चढ़ रहे थे किंतु वह नौजवान लड़का जो पीछे था वह वजन के कारण बहुत धीरे-धीरे चल पा रहा था। लेकिन जब से उसने सोने का नाम सुना था उसका मन तो छलांग मार रहा था।
वह मन ही मन सोच रहा था अगर मुझे यह सारा धन मिल जाए तो मेरा पूरा जीवन तो आराम से कट जाएगा वैसे भी यह बाबा तो बूढ़े हो चुके हैं भला इन्हें इतने पैसों की क्या जरूरत है इनका जीवन तो वैसे भी कट चुका है मैं एक काम करता हूं यह सारे पैसे लेकर यहां से भाग जाता हूं।
लड़के के मन में अनगिनत विचार उठ रहे थे लड़के का मन अब उसकी बुद्धि पर पूरी तरह से हावी हो चुका था और उस लड़के का मन अपनी बात को सही साबित करने के लिए लिए उससे कुछ भी कह रहा था और तभी उस लड़के के मन में एक और विचार उत्पन्न हुआ और अबकी बार वह लड़का यह सोच रहा था।
लगता है यह फकीर बाबा कोई चोर है वरना इनके पास इतनी सारे स्वर्ण मुद्राएं कहां से आएंगे अगर यह कोई व्यापारी होते तो भला यह इस तरह से पैदल यात्रा तो नहीं करते और अगर इनके पास इतने सारे पैसे थे तो यह कोई ना कोई साधन भी तो अवश्य कर सकते थे लगता है।
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यह कोई चोर है और चोर से चोरी करने में भला क्या बुराई है यह सोचता हुआ वह लड़का अब उन फकीर से तेजी से आगे की ओर बढ़ रहा था और देखते देखते वह फकीर से आगे भी निकल चुका था और वह यह सोच रहा था कि जैसे ही इस पहाड़ की ढलान आएगी मैं तीनों गठरिया लेकर भाग जाऊंगा।
इससे यह सारे पैसे मेरे हो जाएंगे और मेरी गरीबी भी हमेशा हमेशा के लिए दूर हो जाएगी मैं जो चाहूंगा मैं वो कर पाऊंगा मेरे पास बहुत सारा धन होगा और देखते-देखते वह दोनों पहाड़ की छोटी पर पहुंच गए और अब ढलान का रास्ता शुरू होने वाला था तभी वह लड़का उन फकीर से नजरें बचाकर वह तीनों गठरिया लेकर भागता हुआ आगे बढ़ गया अब उसे अपना शरीर बहुत हल्का महसूस हो रहा था।
मानो उसे उन तीनों ठेलो का वजन तक ना मालूम पड़ रहा हो काफी दूर दौड़ते दौड़ते किसी तरह से वह अपने आप को बचते बचाते अपने घर पहुंचा उसके खुशी का कोई ठिकाना नहीं था उसने सोचा क्यों ना मैं जल्दी-जल्दी इन गठरिया में से वह सारे पैसे निकाल लूं।
यह सोचकर जब उसने गठरिया खोली तो पहली गठरी में उसे लोहे से जंग भरे हुए सिक्के मिले यह देखकर उसे यकीन नहीं हुआ इस पर उसने फटाफट दूसरी गठरी भी खोल डाली उसमें भी उसे लोहे के जंग लगे हुए सिक्के ही निकले यह सब देखकर वह लड़का बड़ा हैरान था।
आखिर यह सब क्या हो रहा है उन फकीर ने तो मुझसे और ही कुछ कहा था अब उसने वह सोने वाली गठरी खोली और उसमें भी लोहे के जंग लगे हुए सिक्के ही निकले यह देखकर वो लड़का बड़ा क्रोधित हुआ उसने सोचा उन फकीर ने मुझसे झूठ क्यों कहा उन्होंने मुझसे ऐसा क्यों कहा कि एक में तांबे के सिक्के हैं एक में चांदी के और तीसरे में स्वर्ण मुद्राएं हैं।
वह यह सब सोच ही रहा था कि तभी उसकी नजर उस थैले में पड़े एक पत्र पर पड़ी उसने वह पत्र उठाया और उस पत्र में लिखा था यह पूरा नाटक ईमानदार व्यक्ति की खोज करने के लिए रचा गया है और मैं इस राज्य का राजा हूं मेरी कोई संतान नहीं और इसीलिए मैंने यह षड्यंत्र रचा है।
ताकि मैं अपने राज्य में किसी एक ऐसे ईमानदार व्यक्ति की खोज कर सकूं जो मेरे बाद इस राज्य का राजा बन सके और इस राज्य भार को संभाल सके और इस राज्य का भार वही संभाल सकता है जो पूरी तरह से ईमानदार हो जिसके मन में किसी प्रकार का कोई लालच ना हो इतना पढ़ते ही वह लड़का जोर-जोर से चिल्लाने लगा।
वह सर पकड़कर बैठ गया वह यह जानता था कि यदि वह अपने मन के विचारों पर काबू कर लेता तो उसका जीवन संवर सकता था लेकिन वह अपने मन के विचारों पर काबू नहीं कर पाया दोस्तों महात्मा बुद्ध कहते हैं कि मन ही सब कुछ है।
आप जो सोचते हैं वही बनते हैं इसलिए आपका सबसे बड़ा दुश्मन भी आपको उतना नुकसान नहीं पहुंचा सकता जितना कि आपके मन के यह अनियंत्रित विचार पहुंचा सकते हैं महात्मा बुद्ध कहते हैं अपने भीतर ध्यान से देखो हमारे भीतर जो विचार चल रहे हैं वही विचार शब्द बनते हैं और शब्द कर्म के रूप में प्रकट होते हैं।
बार-बार दोहराने पर कर्म बर्ताव में बदलता है और धीरे-धीरे समय के साथ बर्ताव चरित्र में परिवर्तित हो जाता है और यही चरित्र हमारे भाग्य का निर्माण भी करता है इसलिए हमें हमेशा अपने विचारों के प्रति सजक होना बहुत आवश्यक है हमें जागरूक होना बहुत आवश्यक है हमें यह जानना जरूरी है कि हमारे मन में किस प्रकार के विचार आ रहे हैं।
आगे महात्मा बुद्ध कहते हैं कि कमजोरी हमेशा छोटे विचार से शुरू होती है यह एक बीज के रूप में होती है और यदि इस बीज को नष्ट ना किया जाए तो यह छोटा सा विचार बहुत जल्द ही एक विशाल वृक्ष का रूप ले लेता है और हमारी बुद्धि की सोचने और समझने की क्षमता को पूरी तरह से नष्ट कर देता है।
जिस प्रकार आपने इस कहानी में देखा किस प्रकार उस जवान लड़के का मन उस पर हावी हो चुका था और उसकी सही और गलत सोचने की क्षमता पूरी तरह से नष्ट हो चुकी थी जिस कारण वह यह समझ नहीं पाया कि उसे क्या करना चाहिए और उसके लालच ने उसके भीतर इतनी ऊर्जा भर दी कि वह तीनों ठेले उठाकर इतनी तेजी से वहां से भागता आगे भी बढ़ गया।
इसीलिए जब आपके मन में पहली बार कोई गलत विचार उत्पन्न हो तभी उसे जड़ से उखाड़ देना चाहिए अन्यथा वह विशाल वृक्ष का रूप लेगा और आपको किसी ना किसी गलत राह पर वह ढकेल ही देगा आप चाकर भी उसे रोक नहीं पाएंगे लेकिन अब आपके मन में यह प्रश्न उठ रहा होगा कि हम भला अपने मन के विचारों को कैसे नियंत्रित करें हमारा मन तो इतना चंचल है।
वह इतना शक्तिशाली है कि वह हम पर हावी हो ही जाता है हम चाहकर भी उस पर नियंत्रण नहीं कर पाते इसका जवाब में महात्मा बुद्ध हमें दो बातें समझाते हैं पहली बात सही इरादा विकसित करो कई बार आपने देखा होगा कि आपके मन में कुछ और होता है किंतु आप कहते कुछ और है क्योंकि आपके मन के भीतर जो कुछ बसा है वही आपके मुख से बाहर भी निकल रहा है।
लेकिन जब हमसे वह गलती हो जाती है तो उसके बाद हमारा मस्तिष्क अच्छी तरह से काम करना शुरू कर देता है हमारे सोचने और समझने की क्षमता एक बार फिर से जागृत हो जाती है और ऐसी अवस्था में हमें यह एहसास होता है कि हमसे गलती हो गई है और फिर हमारा मन दुखी हो जाता है।
हमारा मन अफसोस से भर जाता है और इस भारीपन और दुख से बचने के लिए महात्मा बुद्ध हमें सही इरादा विकसित करने के लिए कहते हैं इसके लिए जब भी आप कोई कार्य करने जा रहे हो तो सबसे पहले आपको को यह खुद से पूछना चाहिए कि जो कुछ भी मैं करने जा रहा हूं इसके पीछे मेरा इरादा क्या है।
क्या मैं दूसरों को दुख पहुंचाना चाहता हूं या दूसरों को नीचा दिखाने जा रहा हूं या मुझे खुद को ऊपर उठाना है खुद से सवाल कीजिए खुद को जागृत कीजिए जब आप इरादों के प्रति सचेत होने लगेंगे जब आप विचारों के प्रति सजग होने लगेंगे तभी आपके भीतर सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होगा तभी आप सकारात्मक इरादों से जुड़ने लगेंगे और आपके मन के भीतर बसी ई वह नकारात्मक ऊर्जा और नकारात्मक इरादे दिन बदन कम होने लगेंगे।
परंतु याद रहे आपको यह हर रोज करना होगा और आपको यह हमेशा ध्यान रखना होगा कि आपको केवल अच्छा सोचना है आपके इरादे हमेशा अच्छे होने चाहिए तभी आप दुख और तकलीफों से बच सकते हैं अन्यथा आप इसी तरह से दुख और तकलीफों में घिरे ही रहेंगे और आप कभी इससे निकल नहीं पाएंगे।
दूसरी बात मन के प्रति सजगता विकसित करो जिससे आपका मन देखता देखते शांत होगा और आपके मन के भीतर बसी हुई वह नकारात्मक ऊर्जा नकारात्मक विचार खत्म होने लगेंगे और आप शांति की ओर आगे बढ़ेंगे और आपको इसके लिए बस इतना ही करना है कि इस पल में जो कुछ भी हो रहा है।
आपकी आंखों के सामने आपके भीतर जो कुछ भी जैसा भी चल रहा है बस उसे देखते रहना है अपने मन के अच्छे बुरे विचार अपनी भावनाएं और अपनी यादों पर बिना प्रतिक्रिया दिए उन्हें केवल देखते रहना है जिससे आप मन के सारे विचार देखते ही देखते खत्म होने लगेंगे आपका मन खाली होने लगेगा और आप नकारात्मक विचारों से ना सोच से बच सकते हैं और आप इन दुख और तकलीफों से भी दूर रह सकते हैं।
इसीलिए महात्मा बुद्ध कहते हैं जो स्वयं को देखता है वही सबसे बड़ा तपस्वी है अर्थात जो अपने मन में चल रहे उन विचारों को बिना प्रतिक्रिया दिए हुए केवल देखता है और उन पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं करता बस उन्हें देखता और समझता है वास्तविकता में वही मन पर नियंत्रण भी कर सकता है और वही अपना जीवन सुखी और खुशहाली तौर पर जी सकता है।
इसलिए यदि आप भी अपने जीवन को सुखी और खुशहाल बनाना चाहते हैं तो आपको सबसे पहले अपने मन पर नियंत्रण साधना ही होगा अपने मन को खाली करना ही होगा अपने मन के विचारों के प्रति आपको सजग होना ही होगा।
दोस्तों उम्मीद है कि आपने आज की इस कहानी से जरूर कुछ ना कुछ सीखा होगा तो इस कहानी को लाइक और अपने दोस्त के साथ शेयर भी जरूर कीजिएगा और हमें ऐसे ही सपोर्ट करने के लिए चैनल को सब्सक्राइब और घंटी बटन को जरूर दबा दीजिएगा चलिए मिलते हैं फिर अगली कहानी में तब तक के लिए अपना ख्याल रखें।
धन्यवाद.

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