सीख देने वाली कहानी | सफलता की प्रेरक कहानी | हिन्दी कहानी
सीख देने वाली कहानी | सफलता की प्रेरक कहानी | हिन्दी कहानी
सीख देने वाली कहानी = हमारे आसपास समाज में हर तरह की लोग होते हैं। कुछ जो हमें प्यार करते हैं और सही सलाह देते हैं। जबकि कुछ लोग ऐसे भी होते हैं। जिनका काम हर बात में नुस्क निकालना और हमें नीचा दिखाना होता है।
कई बार ऐसे व्यक्तियों का सामना करना काफी मुश्किल हो जाता है। क्योंकि हमें वह तरीका ही नहीं पता कि किस प्रकार से ऐसे व्यक्तियों का सामना किया जाए ताकि उनसे हमारे रिश्ते भी खराब ना हो और उन्हें उनकी इस का अच्छा जवाब भी मिल जाए जो भी दुष्ट प्रकार के व्यक्ति होते हैं ?
वह कमियों को देखने और सुधारने के स्थान पर केवल और केवल दूसरे के आत्मविश्वास पर वार करते हैं। ताकि सामने वाला व्यक्ति प्रभावित हो जाए और जीवन में सफलता हासिल ना कर पाए। इस प्रकार के व्यक्तियों से हमेशा सावधान रहने की आवश्यकता होती है क्योंकि वे केवल अपनी इच्छा पूर्ति के लिए इस प्रकार का व्यवहार कर देते हैं। आइए बुद्ध सन्यासी और उनके शिष्य की यह कहानी सुनते हैं कि यदि कोई व्यक्ति आपको नीचा दिखा रहा है तो उससे किस प्रकार का व्यवहार करना चाहिए।
कहानी शुरू करने से पहले चैनल को सब्सक्राइब जरूर कर ले और बेल आइकन दबा दे दोस्तों गौतम बुद्ध की शिक्षा हर किसी के जीवन को नई दिशा दे सकती है अगर आप भी इसे मानते हैं तो कमेंट्स में नमो बुद्धा लिखना मत भूलिए।
सफलता की प्रेरक कहानी | हिन्दी कहानी .
एक समय की बात है बुद्ध सन्यासी के आश्रम में उनके दो दो बड़े ही विचित्र शिष्य रहा करते थे। दरअसल वे दोनों विचित्र इसलिए थे कि दोनों का स्वभाव बिल्कुल ही अलग था।
जहां एक शिष्य का काम सभी के कामों में गलतियां निकालना और सभी को बिना मांगे भी सलाह देना था तो वहीं दूसरे शिष्य का स्वभाव कुछ ऐसा था कि यदि उसे कोई कुछ कह देता था तो वह जवाब नहीं दे पाता था और घंटों इस बात पर विचार करता रहता था।
दोनों आपस में अच्छे मित्र थे बुद्ध सन्यासी अपने इन दो दोन शिष्यों के स्वभाव से अच्छी तरह परिचित थे। एक बार की बात है दोनों में से वह शिष्य जो जवाब नहीं दे पाता था वह बुद्ध सन्यासी के पास पहुंचा दरअसल वह बेहद दुखी था।
बुद्ध सन्यासी ने जब उससे उसकी परेशानी का कारण पूछा तब उसने बताया कि उसका अपना मित्र ही उसे हर समय नीचा दिखाने का काम करता है। उसके मित्र की आदत को देखकर आश्रम के अन्य सभी बड़े छोटे लोग भी उसे चिढ़ाते रहते हैं और कुछ ना कुछ कहते ही रहते हैं।
लेकिन दुख की बात यह है कि वह कभी उन सबको उत्तर नहीं दे पाता है ना ही उसे वह तरीका पता है। जिससे ऐसे लोगों का सामना किया जा सके अपने शिष्य की यह बात सुनकर बुद्ध सन्यासी मुस्कुराए और बोले यह समस्या तो बड़ी ही सरल है।
तुम स्वयं इन समस्याओं का सामना कर सकते हो लेकिन इसके लिए तुम्हें स्वयं की बुद्धि का प्रयोग करना होगा शिष्य ने कहा कि अब आप ही मुझे बताइए मैं ऐसे लोगों का सामना किस प्रकार कर सकता हूं। बुद्ध सन्यासी ने कहा ठीक है।
मैं तुम्हें उपाय बताता हूं सबसे पहले और मुख्य उपाय है यदि कोई तुम्हारा अपमान करें या तुम्हारे विषय में कुछ ऐसी बात करें जो तुम पसंद नहीं करते तो तुम अपना बचाव कभी मत करो उन्हें जो भी बात करनी है। बात करने दो तुम्हें कोई आवश्यकता नहीं है उन्हें यह समझाने की कि आखिर तुम्हारे साथ यह समस्या क्यों है ?
ऐसा करने से तुम स्वयं उन के द्वारा बताई गई बातों को अपने ऊपर लेकर उन्हें सही सिद्ध कर रहे हो ऐसी स्थिति में अपना बचाव कभी नहीं करना चाहिए। दूसरा उपाय यदि आपके बारे में कोई कुछ बुरा कह रहा है या आपको नीचा दिखाने की कोशिश कर रहा है तो तुरंत ही उस पर हमला करने मत लग जाओ।
ऐसा करने से आप उन्हें एक और मौका दे रहे हैं कि वह आपके ऊपर प्रश्न चिन्ह लगाए अचानक उनकी बातों का जवाब दे देने से आप स्वयं को ही उनकी नजरों में कमजोर सिद्ध कर रहे हैं। कभी नहीं करना चाहिए।
तीसरा उपाय यदि कोई आपको चुभने वाली बात कह रहा है या आपको नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है तो आपको उससे प्रश्न पूछना चाहिए और कारण पूछना चाहिए कि आखिर वह आपके बारे में इस प्रकार से क्यों बात कर रहे हैं ?
ऐसा करने से अगर उनकी मंशा गलत होगी तो वह अपने आप ही शांत हो जाएंगे क्योंकि उनके पास आपके द्वारा पूछे गए प्रश्नों का कोई उत्तर होगा ही नहीं यदि उस व्यक्ति ने आपको कारण बता दिया है कि वह आप के बारे में गलत बातें क्यों कर रहे हैं ?
तब आपको उन बातों का हल अवश्य पूछना चाहिए कि आखिर किस प्रकार से आप अपनी कमियों को दूर करें यदि वह सही मंशा से आपको आपकी कमी बता रहे हैं तो निश्चित ही सबका निवारण उनके पास होगा।
उदाहरण के लिए अगर किसी ने आपको आपके काले रंग के लिए टोक दिया है तो सबसे पहले आप अपना बचाव ना करते हुए उनकी पूरी बात को सुनिए और यह जानिए कि काला रंग होने से आपके क्याक नुकसान है।
अचानक उनके ऊपर हमला मत कीजिए गलत बातें बिल्कुल मत करिए कि पलटकर उन्हें काला कहने मत लग जाइए बल्कि उनसे कारण पूछिए उनसे यह कहिए कि आपको अच्छी तरह से पता है कि आपका रंग काला हैं।
उन्हें यह बताने की आवश्यकता बिल्कुल नहीं है आप उनसे पूछे कि क्या सचमुच मेरा रंग बदला जा सकता है यदि हां तो कैसे साथ ही उन्हें यह भी बताइए कि जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए आप आप का रंग महत्व नहीं रखता है।
सीख देने वाली कहानी | सफलता की प्रेरक कहानी | हिन्दी कहानी
यदि महत्व रखता है तो केवल और केवल आपकी मेहनत इस प्रकार वह व्यक्ति अपने आप ही चुप हो जाएंगे कई बार व्यक्ति बेकार में ही दूसरे व्यक्तियों को उनके शारीरिक बनावट या अन्य बातों के लिए ताने मारते रहते हैं।
यह उनकी आदत में शामिल होता है अपनी कमियों को ना देखकर भी दूसरों को उनकी कमियां बताने लग जाते हैं ऐसे लोग प्रतिदिन कई लोगों को अवसाद में भेज देते हैं।
इसीलिए इनको शांत कराना भी जरूरी हो जाता है हालांकि आपकी प्रतिक्रिया के लिए परिस्थितियां भी जिम्मेदार होती हैं कई बार कुछ लोग आपको नीचा दिखाने के लिए नहीं बल्कि आपकी भलाई के लिए आपको महत्त्वपूर्ण बातें बताते हैं।
ऐसे में अगर आप उनको जवाब देते हैं या रोकते हैं तो आपका ही नुकसान है आमतौर पर हमारे आसपास तीन तरह के लोग होते हैं जो अधिकार के साथ हमारी कमियों या गलतियों को हमें बता सकते हैं और हमें इन तीनों तरह के लोगों से अलग-अलग प्रकार का स्थिति के अनुसार व्यवहार करना पड़ता है।
पहले वह लोग जो हमसे उम्र और अनुभव दोनों में बड़े होते हैं दूसरे हमारे बराबर के सहपाठी होते हैं और तीसरे वे जिनकी उम्र और अनुभव दोनों ही हमसे कम होता है।
ऐसे सोच समझकर ही प्रतिक्रिया करनी चाहिए उम्र में बड़ा अथवा कोई अनुभवी व्यक्ति जैसे कि हमारे माता-पिता गुरु हमें कोई सलाह दे रहे हैं तो ऐसा कभी नहीं सोचना चाहिए कि वह हमें नीचा दिखा रहे हैं।
उनकी बातों पर ध्यान देना चाहिए और जानने का प्रयास करना चाहिए कि इसे किस प्रकार से ठीक किया जा सकता है क्योंकि उनकी मंशा हमारे प्रति कभी गलत नहीं हो सकती वे हमेशा हमारी भलाई के बारे में ही सोचते हैं।
ज़बर्दस्त मोटिवेशनल कहानी | कहानी इन हिन्दी
![]() |
| सफलता की प्रेरक कहानी |
यदि हम उम्र या सहपाठी किसी बात को लेकर आपको नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं तो पहले उनकी बात को ध्यान से सुन लेना चाहिए और फिर इस पर विचार करना चाहिए यदि आपको लगता है कि इस कमी में सुधार करके आपकी भलाई हो सकती है। तभी कोई प्रतिक्रिया करनी चाहिए नहीं तो उनकी बातों को बेकार समझकर वहीं पर भूल जाना चाहिए।
कई बार बड़े लोग अपने से छोटों को अनुभवहीन मानते हैं और उनकी बातों पर ध्यान नहीं देते हैं ऐसा कभी नहीं सोचना चाहिए कि जो हमसे उम्र में छोटा है वह हमेशा गलत बात करेगा। यदि आपका कोई छोटा आपसे सही बात कह रहा है तो उसकी बात को ध्यान से सुनना चाहिए और विचार करना चाहिए कि क्या इससे हमारी भलाई हो सकती है ?
यदि हां तो उसी अनुसार प्रतिक्रिया करनी चाहिए यदि नहीं बल्कि वह नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है तो उसे जवाब देकर शांत कराना चाहिए तब उस शिष्य ने पूछा कि यदि कोई गलत मंशा से हमें नीचा दिखाने का प्रयास करें तब हमारी क्या प्रतिक्रिया होनी चाहिए।
तब बुद्ध सन्यासी ने बताया कि किसी भी गलत मंशा वाले व्यक्ति को नीचा दिखाने के लिए चार प्रकार से व्यवहार किया जाता है मानसिक संतुलन सबसे पहले अपने मानसिक संतुलन को नियंत्र में रखना चाहिए। अगर कोई आपके सामने उल्टी सीधी बात कर रहा है और आपने अपना मानसिक संतुलन खो दिया।
धैर्य नहीं रखा ऐसे में आप स्वयं को ही दोषी सिद्ध कर रहे हैं इसीलिए कभी भी दूसरे द्वारा कही गई बुरी बातों पर अपना मानसिक संतुलन सबसे पहले नियंत्रण करना चाहिए। यदि उस समय आपने धैर्य रख लिया तो निश्चय ही समय आने पर आप उस व्यक्ति को बिल्कुल सही जवाब दे पाएंगे।
ऐसा जवाब देंगे कि दोबारा वह व्यक्ति आपको कुछ नहीं कहेगा वाणी पर संयम कोई आपको नीचा दिखाने वाली बात कर रहा है तो उसके बात को धैर्य पूर्वक सुन लेना चाहिए और अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए।
कई बार व्यक्ति दूसरे द्वारा कही गई बुरी बातों पर अपनी वाणी का संयम खो देते हैं और सामने वाले व्यक्ति को गाली अथवा बुरी बातें कहने लग जाते हैं ऐसा कभी नहीं करना चाहिए। हमेशा अपनी वाणी पर संयम रखना चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपके ऊपर कोई दोष नहीं लगेगा।
कहीं ना कहीं सामने वाले व्यक्ति को अनुभव होगा कि यह तो मुझे कुछ नहीं कह रहा है इसके आगे बोलना ठीक नहीं है उसे बात का कोई फर्क ही नहीं पड़ता इस प्रकार आप चुप रहकर भी सामने वाले व्यक्ति को नीचा दिखा सकते हैं।
उपालंभ उपालंभ एक ऐसा व्यवहार है जो कि बुद्धिमान व्यक्तियों द्वारा सबसे अधिक प्रयोग किया जाता है यदि कोई व्यक्ति आपकी बेइज्जती कर रहा है और आपके बारे में बुरी बातें करके आपको नीचा दिखाने का प्रयास कर रहा है तो इसके लिए दो तरीके हैं।
आप इन तरीकों का प्रयोग करके उन्हें अच्छा जवाब दे सकते हैं पहला उस व्यक्ति को ऊंचा दिखाकर नीचा दिखाना किसी व्यक्ति को ऊंचा दिखाकर नीचा दिखाना बड़ा ही सरल होता है यदि कोई आपकी बेइज्जती कर रहा है।
आपकी शारीरिक बनावट के बारे में बुरा कह रहा है या ऐसा कह रहा है कि आपकी लंबाई बहुत कम है तो आपको इस बात का उत्तर कुछ ऐसे देना चाहि चाहिए कि आप और आपके परिवार की सभी लोग बहुत लंबे हैं।
निश्चित ही उन्हें जीवन के किसी क्षेत्र में मेहनत करने की आवश्यकता नहीं है कि आप लोगों को सफलता तो आपकी लंबाई देखकर ही मिल जाती है। सुनते ही वह व्यक्ति अपने आप में ही शांत हो जाएगा और दोबारा किसी को भी कुछ नहीं कहेगा।
दूसरा उस व्यक्ति को नीचा दिखाकर ऊंचा दिखाना दूसरा व्यवहार है व्यक्ति को नीचा दिखाकर ऊंचा दिखाना यदि किसी ने आपकी लंबाई के बारे में कुछ कह दिया तो इस प्रकार जवाब दे सकते हैं कि आपका व्यवहार बहुत ही अच्छा लगता है। आप इस दुनिया में सभी को अपना परिवार मानते हैं किसकी लंबाई कितनी है।
किसका रंग कैसा है इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं सचमुच आप बहुत ही पारखी नजर वाले हैं। लेकिन दूसरों पर ध्यान देने के स्थान पर यदि आप स्वयं पर ध्यान देने लगते तो आप अवश्य ही विश्व के सबसे ज्ञानी मनुष्य बन जाते इतना सुनते ही निश्चित ही वह व्यक्ति शांत जाएगा और दोबारा आपको कुछ नहीं कहेगा।
चौथे प्रकार के व्यवहार को हम प्रति निवारण के नाम से जानते हैं इसका अर्थ यह हुआ कि सामने वाले व्यक्ति ने जो निवारण आपकी कमियों को ठीक करने के लिए बताया है। आप उसी बात को काटकर जवाब देते हैं।
मान लीजिए अगर आपको किसी ने लंबाई बढ़ाने के तरीके बताएं तरह तरह की दवाइयां और लटकने इत्यादि जैसे तरीके बताएं तब आपको इसका जवाब कुछ इस तरह देना है कि यदि आपने थोड़ा और लटक लिया होता तो निश्चित ही आपकी हाइट और ज्यादा हो जाती और आप विश्व के सबसे लंबे व्यक्ति बन जाते।
इस प्रकार का जवाब सुनकर व्यक्ति को यह महसूस हो जाएगा कि यदि हमने इसे किसी बात को लेकर कुछ कहा तो यह बर्दाश्त नहीं करेगा और हमारी बेइज्जती कर देगा। इसलिए वह दोबारा कुछ कहने की हिम्मत नहीं करेगा। इस प्रकार बुद्ध सन्यासी ने अपने शिष्य को नीचा दिखाने वाले व्यक्तियों से सावधान रहने और उनके साथ व्यवहार करने के अच्छे तरीके बताएं।
बुद्ध सन्यासी की बातों को सुनकर वह व्यक्ति अपने आप में आत्मविश्वास महसूस कर रहा था उसने बुद्ध सन्यासी से वादा किया कि वह इस प्रकार के तरीकों को अपनाए और दूसरों को कभी स्वयं का अपमान नहीं करने देगा।
तो दोस्तों उम्मीद करते हैं कि आपको यह कहानी जरूर पसंद आई होगी कहानी को लाइक जरूर करें। साथ ही इसे अपने परिवार और दोस्तों के साथ भी शेयर करें तब तक के लिए अपना ख्याल रखें।
धन्यवाद नमो बुद्धाय .

Post a Comment